भोपाल को कैटल फ्री बनाने का अभियान शुरू, दोपहर तक पकड़े गए 250 मवेशी

शहर की सड़कों को कैटल फ्री बनाने का अभियान बुधवार से शुरू हो गया है। दोपहर तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 250 से ज्यादा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं और कांजी हाउस में पहुंचा दिया गया है। महापौर आलोक शर्मा ने कहा कि शहर को अज दो जोन में बांटकर काम शुरू किया गया है। जो धीरे-धीरे पूरे शहर में लगातार चलाया जाएगा। राजधानी में पॉयलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद प्रदेश सरकार पूरे प्रदेश में ये अभियान चलाएगी।

अभियान के दौरान प्रभावी कार्रवाई करने के लिए अपर आयुक्त रणवीर सिंह को नोडल अधिकारी बनाया गया है। यही नहीं, नए और पुराने शहर के लिए दो अलग-अलग उपायुक्तों को तैनात किया गया है। उपायुक्त विनोद शुक्ला को नए शहर और सुधीर सिंह को पुराने शहर की जिम्मेदारी दी गई है। कार्रवाई के लिए निगम की गौ संवर्धन शाखा के पांच वाहनों और 62 कर्मचारी अलग-अलग टीमों में तैनात किया गया है। इनके अलावा छह गैंग प्रभारी भी कार्रवाई के लिए तैनात किए गए हैं।

मंत्री दिए निर्देश: पशु पालन मंत्री लाखन सिंह यादव के आदेश के बाद कलेक्टर सुदाम खाडे और  निगम कमिश्नर बी विजय दत्ता ने मंगलवार को नवीबाग स्थित कांजी हाउस और अरवलिया में डेयरी विस्थापन के लिए दी गई जमीन का निरीक्षण किया। अपर रणवीर सिंह और उपायुक्त सुधीर सिंह ने शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित स्लाटर हाउस का दौरा किया। कांजी हाउस में बंद मिले 150 से ज्यादा मवेशियों को सूखी सेवनियां स्थित जीवदया और बैरसिया रोड स्थित भारती गौशाला में शिफ्ट कराया गया। खाली हुए कांजी हाउस में कार्रवाई के दौरान पकड़े गए मवेशियों को रखा जा रहा है। 

डेयरी संचालकों को दी चेतावनी : निगम अमले ने मंगलवार को शहर में संचालित डेयरियों के मवेशियों को खुला न छोड़ने संबंधी चेतावनी दी गई। अब अगर कोई मवेशी खुला घूमता मिला तो उसे पकड़कर राजसात करने की कार्रवाई की जाएगी। अब तक निगम अमला मवेशियों को 225 रुपए पैनाल्टी लेकर छोड़ देता था। निगम के स्वास्थ्य अमले ने मंगलवार को घूमते मिले जानवरों को पकड़ने की कार्रवाइयां भी कीं।

आवारा मवेशी पकड़वाने कॉल सेंटर पर दें सूचना:  आवारा मवेशियों को पकड़वाने के लिए शहरवासी निगम के काॅल सेंटर नंबर 0755-155304 पर काॅल कर सकते हैं। यह काॅल सेंटर 24 घंटे काम करेगा।

15 दिन बाद मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने मीसाबंदियों (लोकतंत्र सेनानियों) बंद की गई पेंशन पर यू टर्न ले लिया है। सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि मीसाबंदियों के भौतिक सत्यापन के बाद पेंशन फिर से शुरू की जाए। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवरात सिंह सरकार के आदेश की कॉपी ट्वीट करते हुए टू टर्न लिखा है।

सन 1977 में आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों को मध्यप्रदेश की तात्कालीन सरकार पच्चीस हजार हर महीने पेंशन के तौर पर देती थी। इस पर प्रतिवर्ष करीब 70 करोड़ रुपए खर्च हो रहे थे। सरकार ने पेंशन वितरण रोके जाने का प्रमुख कारण महालेखाकार की उस रिपोर्ट को बताया है जिसमें महालेखाकार ने पिछले वित्तीय वर्षों में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि में भुगतान को बजट प्रावधान से अधिक का बताया था।

सरकार ने लगाई थी रोक: सरकार की तरफ से सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से प्रदेश से सभी संभाग के कमिश्नर और कलेक्टरों को दिए निर्देश में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि के राशि के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद मीसा बंदियों को पेंशन मिलना बंद हो गई थी। इस संबंध में पिछले सप्ताह ग्वालियर की हाईकोर्ट बैंच में एक याचिका भी दायर की गई थी। भाजपा नेताओं ने सरकार के इस फैसले को विरोध करते हुए इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया था। वहीं कांग्रेस के नेताओं का कहना था कि भाजपा से जुड़े लोग फर्जी तरीके से पेंशन ले रहे हैं।

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